केन्द्रीय गृह मंत्रालय के “सहयोग” पोर्टल के अस्तित्व में आने के एक साल में 19 ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को 2312 ब्लॉकिंग आदेश भेजे गए हैं, यह जानकारी इंडियन एक्सप्रेस ने सूचना अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी से दी है।
यह संख्या बताती है कि यह पोर्टल कैसे ऑनलाइन सेन्सरशिप दायरे का विस्तार कर रहा है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, और इंस्टाग्राम समेत प्लेटफॉर्म को भेजे गए इन आदेशों में कथित आपत्तिजनक और गैरकानूनी समेत तमाम तरह के ऑनलाइन लिंक हटाए जाने के निर्देश शामिल हैं।
मिली जानकारी के अनुसार ब्लॉकिंग आदेश जिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भेजे गए उनमें मेटा परिवार के फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम का हिस्सा 78 फीसदी है। इसमें भी सबसे ज्यादा व्हाट्सऐप (1392) का है। इसके अलावा फेसबुक को 255, यूट्यूब को 176, इंस्टाग्राम को 169, टेलीग्राम को 123, गूगल को 93, एप्पल को 43 और ऐमज़ान को 23 आदेश भेजे गए। अन्य प्लेटफॉर्म, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, लिंक्डइन, और स्नैपचैट शामिल हैं, को 38 आदेश भेजे गए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस दौरान मई में ऑपरेशन सिंदूर का दौर शामिल है, जिसमें काफी सारी सामग्री और खाते हटाए गए जिनमें वह सामग्री शामिल थी जो कथित रूप से पाकिस्तान से अपलोड की गई थी। “एक्स” के एलन मस्क ने कहा था कि उनके प्लेटफॉर्म को सरकार से 8000 से ज्यादा खाते ब्लॉक करने के आदेश मिले थे। इनमें “अंतर्राष्ट्रीय समाचार संगठनों और प्रमुख एक्स उपयोगकर्ताओं के नाम शामिल थे।
कुल मिलाकर औसतन प्रति दिन 6 ब्लॉकिंग आदेश जारी हो रहे हैं जबकि 2024-25 में यह संख्या औसतन प्रति दिन एक आदेश की थी। इन आदेशों में खास सामग्री हटाने से लेकर, वेबसाईट या यूट्यूब चैनल अथवा सोशल मीडिया खाते बंद/निलंबित करना शामिल है।
“एक्स” ने सरकार के ब्लॉकिंग आदेशों के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय में मुकदमा किया था। सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 79(3)(ब) के तहत सरकारी एजेंसियों के ब्लॉकिंग आदेश जारी करने को चुनौती देते हुए एक्स ने कहा था कि केंद्र एक “समानांतर” सामग्री ब्लॉकिंग शासन स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और सहयोग सेन्सरशिप पोर्टल है। सितंबर में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बावजूद अक्टूबर में सरकार ने एक कदम पीछे हटते हुए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन किया जिससे केवल वरिष्ठ अधिकारी ही ब्लॉकिंग आदेश जारी कर सकते हैं और इनकी मासिक समीक्षा भी होगी।